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। शरीरमद्यं खलु धर्मसाधानम् ।

जरा, व्याधि एवं मृत्यू के प्रतिकों में संसार का दुःख जब-जब उभरा तब-तब प्राचीन ऋषियों ने करुणावश दुःख निवारण के उपाय खोज निकाले । चिकित्सकीय श्रेणी में आनेवाले कार्यों के अतिरिक्त शुद्ध और सात्विक आहार-विहार एवं विचार की सांस्कृतिक परंपरा का पुनर्गठन किया।उन्होंने मानव, समाज और प्रकृति के मध्य सह-अस्तित्व के संबंध को परिभाषित करते हुए, वैज्ञानिक आधार पर जीवन के शाश्वत मूल्यों की खोज की और मानव जीवन के साथ इसका समन्वय स्थापित कर विचार और व्यवहार की एक स्‍वस्‍थ परंपरा स्‍थापित करने का प्रयास किया । 

किन्‍तु आधुनिक सभ्यता के दौर में मानव समाज ने पूर्वजों के वैज्ञानिक नियमों की अवहेलना करके प्रकृति से अपने संबंध का विच्‍छेद कर, उपभोगोक्‍तावादी मूल्‍यों को विकसित होने का अवसर दिया है। परिणाम उपभोक्‍तावादी मूल्यों ने मानव, समाज और प्रकृति के बीच परस्पर एकात्मता के संबंध को नकार कर उनका शोषण किया है। शोषण की इस मानसिकता के कारण निर्सर्गिकता का उत्तरोत्तर लोप लोप हो रहा है।  पेड-पौधें, जिव-जंतु, जुगनू-पंतगें सभी कही खो से रहें है। नदी-नालों का दायरा सिमट सा रहा है। अभाव की यह दशा स्वास्थ्य और स्वस्थ रहेने की प्रक्रिया को बाजार के मूल्यांकन पर विकसित कर चुंकी है। वहां मानव समाज आज अधिकाधिक रोग और शोक की पीडा का उपभोग करने के लिए विवश हो गया है। 

मानव जीवन का हर क्षेत्र आज लगभग बीमार है । शारीरिक, मानसिक, पारिवारीक, सामाजिक एवं सांस्‍कृतिक स्‍तरपर मनुष्‍य की रूग्‍नता का असर अब छुपाया नहीं जा सकता। अत: ऐसे परिपेक्ष्य में जनहितों की तार्किकता को महत्त्व देते हुए, जन सामान्‍यों के लिए सर्वांगीन, सहज, सुलभ और कम से कम लागत पर उन्नत एवं उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवायें, आरोग्य मार्गदर्शन एवं आरोग्‍य प्रदायी उत्‍पाद उपलब्ध करवाने के साथ-साथ मानव मन के साथ संवाद स्‍थापित कर, उसे पूर्वजों के वरदान और विज्ञान से अवगत कराने हेतु ‘श्री जे जे टी नैचुरोपैथी सेन्‍टर’ आज प्रतिबद्ध है।  
श्री जे जे टी नैचुरोपैथी सेन्‍टर स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत प्रबुद्ध चिंतकों, दक्ष चिकित्सकों, आरोग्‍य मार्गदर्शकों, योग शिक्षकों एवं प्रकृति के साथ सहज सामंजस्‍य स्‍थापित कर स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धक चीज़ों को उत्पादित करने वाले सुज्ञ-जनों का समुह है। जन सामान्यों के लिए योग, आयुर्वेद आदि अभिगमों द्वारा आरोग्य मार्गदर्शन, आरोग्य सेवाएं एवं प्राकृतिक गुणों से भरपुर जैविक खाद्य उपलब्ध करवाने हेतु यह समुह संकल्पबद्ध है। 

मानव रोगावस्था में स्वस्त, सुलभ एवं संपूर्ण रूप से निर्दोष ऐसे पंरपरागत योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक उपचार पद्धतियों का अवलंब कर स्‍वास्‍थ्‍य लाभ ले सके। प्रकृती के नियमों को समझकर निरामय जीवन जी सके तथा सृष्‍टी के सृजन में अपना अमूल्‍य योगदान दे सके। इस दृष्‍टी से श्री जे जे टी नैचुरोपैथी सेन्‍टर अपनी सेवायें लोक समर्पित करने के साथ- साथ मानव समाज के साथ सार्थक संवाद स्‍थापित करने का भी प्रयास कर रहा है, जिससे जीवन के प्रति मानव की समझ अधिक बेहतर बन सके।
आरोग्‍य संजीवन उसी संवाद की एक पहल है। मानव कल्‍याण की अभिलाषा रखनेवाले सुज्ञ-जन, चिकित्‍सक, आरोग्‍य मार्गदर्शन इत्यादि का इसमे अमूल्य योगदान देने का प्रयास करेंगे। अत: ऐसे समुह के साथ जुडने एवं उनसे संवाद जारी रखने लिए आपका स्वागत एवं अभिनंदन हैं।

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