हमारे बारे में

शरीरमद्यं खलु धर्मसाधानम्


आधुनिक सभ्यता के दौर में मानव समाज प्राकृतिक नियमों की अवहेलना करके प्रकृति से जितना दूर जा रहा है उतना वह दण्ड स्वरुप अधिक रोग भोग रहा है। अतः मानव प्रकृती के नियमों को समझकर शरीरमन, चित्त, बुद्धि की स्वस्थता से युक्त निरामय जीवन व्यथित कर सके तथा रोगावस्था में स्वस्त, सुलभ एवं संपूर्ण रूप से निर्दोष ऐसे पंरपरागत  योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक उपचार पद्धतियों द्वारा स्वास्थ्य लाभ ले सके इस उद्देश्य से 'श्री जे जे टी विश्वविद्यालय' के प्राकृतिक परिवेश में 'प्राकृतिक आयुर्विज्ञान एवं मानव मूल्य अध्ययन विभाग' द्वारा "सेठ फतेह्चंद पालीराम झुन्झुनूवाला प्राकृतिक आयुर्विज्ञान केंद्र" का सञ्चालन किया गया हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत दक्ष चिकित्सकोंविशेषज्ञों एवं प्रबुद्ध चिंतकों द्वारा जन सामान्यों के लिए आरोग्य मार्गदर्शन एवं आरोग्य सेवाएं उपलब्ध करवाना, योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक आयुर्विज्ञान की विविध ज्ञान शाखाओं में अध्ययन-अध्यापन संपन्न करवाना तथा प्राकृतिक आयुर्विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्यकमों का सञ्चालन करना यह इस केंद्र का उद्देश्य रहा हैं 
आधुनिक चिकित्सा में अन्तर्निहित दोषों के विपरीत प्राचीन भारतीय प्राकृतिक आयुर्विज्ञान का उपचार तंत्र स्वस्त, निर्दोष एवं रोगमूल का नशा करके पूर्ण स्वास्थ्य देने का सहस्रों सदियों से अनुभव रखते आये हैं स्वास्थ्यस्य स्वास्थ्य रक्षणम् व्याधितानां व्याधि परिमोक्षः। इस उद्देश्य का अनुसरण करते हुए, प्राणी जगत के कल्याण, दिर्घायु, सुखायु एवं दुःख विमुक्ति के अपूर्व आश्वासन से योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा मनुष्य जाति के लिए एक अद्भुत वरदान सिद्ध साबित हुए हैं। जरा, व्याधि एवं मृत्यू के प्रतिकों में संसार का दुःख जब जब उभरा तब तब प्राचीन चिकित्सकों ने करुणावश दुःख निवारण के उपाय खोज निकाले। चिकित्सकीय श्रेणी में आनेवाले कार्यों के अतिरिक्त योग-आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा की परंपरा ने सामाजिक सांस्कृतिक आचरण को सुनिश्चित किया। मानव, समाज और प्रकृति के मध्य सह-अस्तित्व के संबंध को परिभाषित करते हुए विज्ञान का शाश्वत मूल्यों के साथ समन्वय स्थापित किया और दिनचर्या, ऋतुचर्या आदि विचार से दैनिक जीवनक्रम में दर्शन की अद्वितिय परंपरा स्थापित की।
किन्तु आधुनिकता के मूल्यों ने मानव, समाज और प्रकृति के बीच परस्पर एकात्मता के संबंध को नकार कर उनका शोषण किया और ऐसी जीवनशैली में जीने के लिए विवश किया हैं जहाँ निर्सर्गिकता का उत्तरोत्तर नाश हो रहा है। वहां बाजार के मूल्यांकन पर स्वास्थ्य और स्वस्थ रहेने की प्रक्रिया को विकसित होने का अवसर भी मिला है। ऐसे परिपेक्ष्य में जनहितों की तार्किकता को महत्त्व देते हुए योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के संयुक्त अभिगम द्वारा सर्वांगीन, सहज, सुलभ और कम से कम लागत पर परंपरागत शैली में आरोग्य मार्गदर्शन एवं उन्नत उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करवाने जहां "सेठ फतेह्चंद पालीराम झुन्झुनूवाला प्राकृतिक आयुर्विज्ञान केंद्र" आज प्रतिबद्ध है। वहां योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा का चयन करने के लिए आपका स्वागत एवं अभिनंदन हैं।

केंद्र की विशेषताएं : 

श्री जे जे टी विश्वविद्यालय के प्रांगन में स्थापित इस केंद्र के प्रशस्त भवन में महिलाओं एवं पुरुषों के उपचार हेतु स्वतंत्र व्यवस्था हैं
मसाज, बाष्पस्नान, कटीस्नान, रीढ़स्नान, टबस्नान, मिट्टीपट्टी, मिट्टीलेप, शिरोधारा, शिरोबस्ती, शिरोपिचु, औषधीय काढों का सेक, एनिमा, एक्यूप्रेशर, फ़िजिओथेरेपि, योग आदि विविध आयुर्वेदिक, प्राकृतिक एवं यौगिक उपचारों हेतु महिला और पुरुष के स्वतंत्र विभागों में अलग अलग कक्षों तथा उच्चश्रेणी के आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया हैं। दूर के मरीजों के लिए सामान्य एवं वातानुकूलित आवास की सुविधा न्यूनतम दरों में केंद्र में उपलब्ध करवाई गयी है

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