हमारी-सेवाएँ

केंद्र में उपलब्ध सेवाएं
योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक स्वास्थ्य  इत्यादि अभिगमों द्वारा यहां पर निम्न लिखित स्वास्थ सेवायें उपलब्ध करवाई जाती है।
1. निरापद वनौषधी द्वारा शमन-उपचार।
2. मसाज (स्नेहन), औषधीय काढों का सेक (स्वेदन), पिरक्षेक, पिंड-पोटली स्वेदन, वमन, विरेचन्, एनिमा (बस्ती), हृद्यबस्ती, कटीबस्ती, जानुबस्ती, शिरोबस्ती, शिरोधारा, शिरोभ्यंग, शिरोपिचु, नस्य, नेत्रतर्पन, नेत्रधावन, कर्णपुरण, कवल, गण्डुंष, उद्वर्तनम् आदी संपूर्ण आयुर्वेद पंचकर
3. जलचिकित्सा : ठंडा गरम पानी की पट्टी, कटिस्नान रीढ़स्नान, बाष्पस्नान आदि प्राकृतिक उपचार।
4. लेप : हर्बल मृतिकालेप, गोमयलेप, औषधि लेप-प्रलेप एवं सौदर्यं चिकित्सा।
5. योगासन, प्राणायाम, ध्यान, मुद्रा, एवं यौगिक शुद्धिक्रिया द्वारा तन और मन की चिकित्सा।
6. अत्याधुनिक कम्प्युटराईज्ड मशीनों द्वारा एक्युप्रेशर एवं फिजिओथेरेपी सुविधा।
७. पथ्या पथ्यः अर्थात आहार विहार का नियोजन एवं मार्गदर्शन की उपलब्धता।
८.परिचर्चा, संगोष्ठीयों द्वारा मनोदैहिक स्वास्थ्य शिक्षा एवं आध्यात्मिक बोध का विकास।
९. दूर के मरीजों के लिए न्युनतम दरों में सामान्य एवं वातानुकुलित आवास की सुविधा।
10. नशा मुक्ति हेतु समुपदेशन एवं मार्गदर्शन सुविधा केंद्र में उपलब्ध हैं ।
केन्द्र में किन रोगों का  उपचार किया जाता है-
1. मानसिक तनाव, अनिद्रा, अपस्मार, उन्माद, स्मृतिदौर्बल्य आदि मस्तिष्कतंत्र संबंधित विकार ।
2. अजिर्ण, अम्लपित्त, अतिसार, कब्ज, कृमीरोग, मोटापा, मधुप्रमेह, यकृत-प्लीहा आदि उदर संबंधित विकार।
3. नजला, जुकाम, ज्वर, श्वास, कास (दमा) आदि श्वसनतंत्र संबंधित विकार ।
5. अनियमित रक्तदाब, हदय दौर्बल्य, हदयवेदना, हदयाघात आदि रक्त परिभ्रमण संबंधित विकार।
6. आमवात, कंपवात, पक्षाघात, साईटिका, स्पोन्डीलाईटीस, कमर-जोडों का दर्द आदि वात संबंधित विकार।
७. खुजली, एलर्जी, दाद, एक्झिमा, विचर्चिका, विस्फोट, मसूरिका, श्वेतकृष्ठ आदि त्वचा संबंधित विकार।
८. फोडा-फुन्सी, ग्रंथी (गांठे), गंडमाला, अपची, अर्बुद (कॅन्सर) आदि लसिकातंत्र संबंधित विकार।
९. मुत्रावरोध, मुत्रदाह, बहुमुत्रता, शोथ (सूजन), अश्मरी (पथरी), किडनी आदि मूत्रतंत्र संबंधित विकार।
10. फिरंग, उपदंश, स्वप्नदोष, ध्वजभंग, नपुसंकता, वंध्यत्त्व एवं स्त्रियों के मासिक संबंधीत रोग आदि बीमारीयों का यहां प्राकृतिक विधि से सफलता पूर्वक उपचार किया जाता है।
मुखपत्र 
समाज में स्वास्थ्य समस्यायें दिन-प्रतिदिन विस्तार ले रही हैं। इसके कारणों की मीमांसा की जाये तो अधिकतर बिमारीयाँ सोच-विचार, आहार-विहार और जीवनशैली से आसन्न रोगों का प्रतिरूप प्रतित होती है। सोच-विचार, आहार-विहार और रहन-सहन के तौर तरिकों पर विर्मश करतें हुए, सोचने, समझने, परखने और जीने के अंदाज में प्राकृतिक जीवनशैली की सिद्धता बनाए रखना आरोग्य संजीवन इस मुखपत्र का प्रयोजन है। ठीक वैसे ही वैज्ञानिक धरातल पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करना भी इस मुखपत्र का उद्देश्य रहा है। इस मुखपत्र में आप प्राकृतिक जीवन, योग-मनोदृष्टि, आयुर्वेद, आहार, रोगोपचार आदि विषयों में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है।
प्रशिक्षण उपक्रमः
प्राकृतिक आयुर्विज्ञान के वैज्ञानिक परिपेक्ष्य में योग्य चिकित्सक/अभ्यासक निर्माण होवें। प्राकृतिक आयुर्विज्ञान की विविध ज्ञान शाखाओं के विकास में वह निमित्त बने तथा राष्ट्रीय स्तर पर आरोग्य सेवकों और आरोग्य मार्गदर्शकों की जरूरत पूरी हो। इस उद्देश्य से विश्वविद्यालय योग प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, डिप्लोमा इन नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस, डिप्लोमा इन योग एज्युकेशन एंड साइंस ऑफ़ लाइफ, डिप्लोमा इन आयुर्वेद पंचकर्म-जड़ी-बुटी परिचय एवं जैव प्रसंस्करण आदि विषयों पर पाठयक्रम निर्धारित करके शिक्षण-प्रशिक्षण के उपक्रम भी संचालित कर रहा है। प्रत्यक्ष संपर्क से अथवा हमारी बेव साईट से आप इस विषय की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर इन पाठयक्रम में सहभाग ले सकते है।
लोकशिक्षण
स्वास्थ्य के सामान्य एवं विशेष पहलु व उपलब्धियों का दक्ष चिकित्सकों, प्रबुद्ध चिंतकों एवं विशेषज्ञों में आदान-प्रदान हो। जन समुदाय भी इससे परिचित व लाभान्वित हो इस उद्देश्य से साहित्य प्रकाशन, योग शिविर, आरोग्य मार्गदर्शन शिविर, चर्चासत्र, परिसंवाद, कार्यशालाएँ, संगोष्ठीयाँ (सेमिनार), सम्मेलनों का समय समय पर आयोजन किया जाता है। वैज्ञानिक विशिष्टताओं में अनुसंधान कार्यक्रमों का संचालन कर नये शोध-समिकरणों को जन सन्मुख प्रस्तृत करना भी हमारा लक्ष्य है। अत: इसकी सुचना आयोजन अवसरों पर प्रकाशित भी की जाती है। 
हेल्थ शॉप
एक ओर औद्योगिक संस्कृती के जहरीले प्रभावों ने अप्राकृतिक, स्वास्थ विघातक उत्पादों और उपकरणों का निर्माण कर प्रकृति-पर्यावरण, कृषी, वनस्पतीओं, विविध जैव संसाधनों एवं मानवीय स्वास्थ्य के लिए संकट उत्पन्न किया है। तो दूसरी ओर केंद्रिकृत बाजार के प्रभाव से अनेक लोग बेरोजगार हो रहे है। इन स्थितियों में स्वदेशी की अवधारणा को प्रोत्साहित कर, छोटे छोटे समूह द्वारा उत्पादित विषाक्त रसायनों से मुक्त, पर्यावरण अनुकूल, प्राकृतिक एवं स्वास्थ्य संवर्धक उत्पादन के वितरण का यहा एक प्रयास किया गया है। यहां से आप स्वास्थ वर्धक गृहउपयोगी उत्पादन, जैविक खाद्यान्न, चिकित्सा आनुषंगिक वस्तुयं एवं आरोग्य विषयक पुस्तके इत्यादि प्राप्त कर आरोग्य लाभ के साथ-साथ स्थानिय किसान, मजदूर और परंपरागत कारीगरों के लिए रोजगार का बेहतर अवसर उपलब्ध करवा सकते हैं।
प्राकृतिक सम्पदा संरक्षण

जीवन का जैविक आधार जल, जमीन, जानवर, वनस्पति आदि के संरक्षण-संवर्धन हेतु पर्यावरण संरक्षण, वृक्ष रोपण, जैविक कृषि, स्वच्छता अभिक्रम जैसे अभियानों में सहभागी होकर प्राकृतिक सम्पदा का संवर्धन करना केंद्र का उद्देश्य है। वहा प्रकृति से प्रदत्त हर्बल औषधियों के मानकीकरण, सुरक्षा और प्रभावशीलता को सुनिश्चित करते हुए प्राकृतिक रूप से निर्दोष, सिद्ध फलदायी औषधि तथा औषधिय पौधौ को जन जन के लिए उपलब्ध करवाना यह  हमारा प्रयोजन हैं। 

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